"मम्मा, मुझे ट्रेक सूट चाहिए।"
"पहले तुम ट्रेक पर आ जाओ"
"मम्मा, आप भी ना"
"तो सन्डे हे तो क्या उठना नही हे। चलो नहा धोकर
फ्री हो जाओ"
"थोड़ी देर बाद,प्लीज् मम्मा"
"नो, गेट अप फ़ास्ट"
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कुछ देर बाद....
"क्यू, अब लग रहा हु ना माँ का लाल"
"हम्म..तुम लाल और तुम्हारे पापा पीले(पीली टी शर्ट में)
..बस अब दोनों मिलकर कोई कारनामे मत करना वरना
मै लाल पीली दोनों हो जाउंगी"
"क्या मम्मा, छुट्टी
के दिन भी मस्ती मज़ा नही करने देती"
" छुट्टी होगी तुम्हारे लिये, मेरे लिए तो एक्स्ट्रा वर्किंग डे होता हे"
और इसी तरह हर सन्डे की तरह ये सन्डे भी गुजर गया, बच्चो पर चिल्लाते, एक्स्ट्रा काम और झुंझलाहट के साथ। मगर फिर भी इन सब के सिवा और दुनिया में रखा क्या हे। बाकि तो सब बस.......
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