अक्सर लोग ये कहते मिल जाते हे कि हमे फिजूल की औपचारिकताए पसंद नही हे। मगर महिलाओ के मामले में अगर देखा जाये तो, खासकर वो महिलाए जिनका अक्सर बाहर के लोगो से मिलना जुलना होता रहता हे तो, ऐसे मामलो में औपचारिकताए अच्छी हे। क्युकी देखने में तो यही आता हे कि महिलाए जरा सी भी सहज होने लगती हे तो कई पुरुष उनकी इसी सहजता और सरलता को बढ़ावा देना समझ लेते हे। और कभी कभी आगे चलकर ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हे जो अक्सर जेहनी तकलीफों का सबब बनता हे। ऐसे में यही कहा जा सकता हे की औपचारिकताए अच्छी हे।
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