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Friday, 25 November 2016

शादी के लिए अनिवार्य योग्यता

पिछले दिनों एक दूर की रिश्तेदार से मुलाकात हुई, काफी दिनों से अपने बेटे के लिए लड़की देख रही हे। मगर अभी तक कोई उनके मानकों पर खरी नही उतरी। मैंने कहा आंटीजी ऐसा भी क्या देख रही हो। बोली "अब क्या कहें आजकल के लडको को ख़ूबसूरत, पढ़ी लिखी तो चाहिए ही प्रोफेशनली क्वालिफाइड भी हो।अब देखो ना आजकल तो लडकिया घर सम्भालने के साथ नोकरी भी करती हे।" मैंने कहा "मगर नोकरी करे या नही ये तो उस लड़की की मर्जी हे, कोई अपनी बहु से नोकरी करवाने की डिमांड या उम्मीद कैसे कर सकता हे। ये उसकी जिम्मेदारी तो नही हे।"
बोली "अब आजकल का तो चलन हे, हम अगर नोकरी पेशा बहु चाहते हे तो इसमें क्या गलत हे।"
खैर ये उनकी सोच थी। मगर हम घर लौटते वक़्त यही सोच रहे थे की एक वक़्त था जब शादी के लिए रंग रूप तक को ज्यादा तवज्जो ना देकर स्त्री सुलभ गुणों को तवज्जो दी जाती थी। फिर सीरत के साथ साथ सूरत को भी जरुरी समझा जाने लगा। और कम ख़ूबसूरत और गरीब लड़की की शादी एक बड़ा मसला बन गयी। और अब कही गोरी ख़ूबसूरत और पढ़ी लिखी होने के साथ साथ प्रोफेशनली क्वालिफाइड होना शादी के लिए अनिवार्य योग्यता ना बन जाये। वक़्त बदल तो रहा हे मगर वक़्त के साथ साथ समाज की सोच बदलने में शायद बहुत वक़्त लगेगा।

Monday, 21 November 2016

जादुई अल्फाज़

कुछ अल्फाज़ जादुई असर रखते हे। इसी तरह का एक वाक्य हे " मायूसी कुफ्र हे"। मतलब जो ज़िन्दगी में किसी भी मुश्किल वक़्त में मायूस हो गया मतलब उसने खुदा को मानने से इंकार कर दिया जो हर तकलीफ में हर यकीन करनेवाले के साथ होता हे। किसी और का पता नही मगर हम जब भी किसी वजह से मायूस या निराश होते हे तो फ़ौरन ख्याल आता हे की नही अगर हमे खुदा की ज़ात में यकीन हे तो हम उसकी रहमत और मदद से मायूस नही हो सकते। और अगले ही पल दिल और दिमाग में उस मुश्किल वक़्त का उम्मीद के साथ सामना करने का होसला महसूस होता हे। इसीलिए ये अल्फाज़ हमारी ज़िन्दगी में जादू का असर रखते हे।