हमारे देश मे जिस तरह अंग्रेजी को अपनाया गया है, उस तरह दूसरे देशों में दूसरी भाषा को नही अपनाया जाता। बाकि देशो में अपनी मातृभाषा को तरजीह दी जाती है। अंग्रेजी को दूसरी भाषा के विकल्प के रूप में कम्युनिकेशन स्किल बढ़ाने के लिए अपनाया जाता है।मग़र हमारे देश मे अंग्रेजी एक भाषा से बढ़कर स्टेटस सिंबल बनती जा रही है जोकि वाकई चिंता का विषय है। लेकिन करीब 77 फीसदी भारतीयों द्वारा बोली और समझी जाने वाली भाषा हिंदी को किसी भी तरह है हाशिये पर नही रखा जा सकता।
पिछले कुछ सालों में इस बात की चेतना पैदा भी हो चुकी है औऱ निरंतर बढ़ती जा रही है। आज हर पांच वर्ष में हिंदी की विषय सामग्री में 94% की बढ़ोतरी हो रही है, अंग्रेजी विषय सामग्री के 19% बढ़ोतरी के मुकाबले में। ये सुखद बदलाव है।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि " हिंदी का पेट महासागर की तरह विस्तृत है, जिसमे सभी भाषाये समा सकती है।"
आज हिंदी विश्व की भाषाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हमें अपनी मातृभाषा हिंदी की रक्षा करते हुए, एक सामान्य भाषा के रूप में अंग्रेजी को ग्रहण करना चाहिए, ना कि स्टेटस सिंबल की तरह।
आज हिंदी दिवस पर सभी हिंदी भाषियों को हार्दिक शुभकामनाएं।