यू तो कोई बात भी बेसबब नहीं करते,
और कहते हे लोग की वो सौदा नही करते।
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Saturday, 31 December 2016
Tuesday, 27 December 2016
समाज पुनर्निर्माण में माँ की भूमिका
देखते ही देखते ये साल भी गुजर गया। पीछे छोड़ गया कुछ अच्छी बुरी, खट्टी मीठी यादे। ये वर्ष विदा लेने के कगार पर हे और यही सही वक़्त हे की हर स्त्री दुःख और सुख के मिले जुले अनुभवों से सीखकर, जिए गये जीवन और विचारो का विश्लेषण करे और अपनी संतान को जागरूक बनाये और अच्छे बुरे की पहचान सिखाये। आखिर आज गिरते हुए नैतिक स्तर की वजह मूलरूप से मानवीय चेतना का अभाव ही तो हे। आज नैतिकता को ताक में रखकर बड़े बड़े उपद्रव करने वाले, कभी थे ही तो बच्चे ही ना। अगर उन्हें बचपन से उचित संस्कार दिए जाते तो आज लाभ, लोभ और लालच में अंधे होकर, इतनी आसानी से ये सब नही कर जाते। आज अगर हम अपनी संतान को सही गलत का फर्क करना, नारी का सम्मान करना, बड़े बुजुर्गो की इज्जत और मदद करना और आजीविका के लिए यथासम्भव ईमानदारी रखना सिखायेंगे, तब जाकर वो कल के अच्छे इन्सान और अच्छे नागरिक बनेंगे।
Friday, 23 December 2016
औरत भी एक स्वतंत्र इकाई
हम चाहे खुद को कितना भी सभ्य कहे, मगर सच तो यही हे की आज भी हमारे समाज ने औरत को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में स्वीकार नही किया हे। आज भी किसी स्त्री की ना पुरुष के अहम को चोट देती हे। और पुरुष अपने मर्द होने के अहंकार में चूर, औरत को किसी ना किसी रूप में सबक सिखाने की कोशिश करता हे। ये अलग बात हे की सबका तरीका अलग होता हे। पढ़े लिखे सभ्य और संस्कारी लोग ये काम जरा शालीन तरीके से करते हे। क्या कभी हमारा समाज इतना सभ्य हो पायेगा की किसी औरत की हां या ना उतनी ही मायने रखे जितनी पुरुष की रखती हे।
Wednesday, 14 December 2016
ख़ुशी की टेबलेट
ज़िन्दगी में इन्सान की सबसे बड़ी ख्वाहिश होती हे ख़ुशी। हर एक ख़ुशी पाने की कोशिश करता हे, विभिन्न तरीको से, मगर आसान नही होता ज़िन्दगी में खुशियों का मिलना। चिकित्सा विज्ञान में हर दिन नये अनुसन्धान हो रहे हे। काश आनेवाले वक़्त में कोई टेबलेट ख़ुशी की भी आ जाये, की बस एक गटक लो पानी से और पूरा दिन खुश खुर्रम। फिर हर एक खुश रहे क्या अमीर क्या गरीब। क्या छोटा क्या बड़ा। लोग दाल में भी खुश और चप्पन भोग में भी खुश। क्या नजारा हो जब गुस्से से आग बबूला दुश्मन को भी किसी तरह पानी में घोलकर टेबलेट पिला दी जाये तो वो नफरत की जगह मोहब्बत बरसाए। कसम से दुनिया स्वर्ग बन जाये। हमे तो सोचकर ही ख़ुशी हो रही हे, एक टेबलेट खुशियों वाली।
Tuesday, 6 December 2016
केशलेश इंडिया
"केशलेश इंडिया" का नारा जोरो पर हे। वैसे " केशलेश" से इतने भी अनजान नही हे हम भारतीय। लगता तो यही हे जैसे हर दूसरा भारतीय "केशलेश" से पीड़ित हो, वरना "केश चिंग पिंग" और "केश आन्ति कांती" के नाम पर बाबा ज्ञानदेव और उन सरीखे "केशयुक्त" कैसे हो जाते। खैर किसी की क्या कहें, चक्कर में तो हम भी आ गये। तीन चार बोतल खाली करने के बाद भी जब केश में कांति नजर नही आयीं, तब पता चला की भैय्या "पोपट" बन गये। एक तरह का केशलेश तो संभाल नही पाए , बस अब तो यही दुआ हे की दूसरी तरह का "केशलेश" जरुर सफल हो जाये, वरना कही प्रयोग विफल हो गया तो सच में राधे के गंजे होने की नोबत आ जाएगी।
Friday, 25 November 2016
शादी के लिए अनिवार्य योग्यता
पिछले दिनों एक दूर की रिश्तेदार से मुलाकात हुई, काफी दिनों से अपने बेटे के लिए लड़की देख रही हे। मगर अभी तक कोई उनके मानकों पर खरी नही उतरी। मैंने कहा आंटीजी ऐसा भी क्या देख रही हो। बोली "अब क्या कहें आजकल के लडको को ख़ूबसूरत, पढ़ी लिखी तो चाहिए ही प्रोफेशनली क्वालिफाइड भी हो।अब देखो ना आजकल तो लडकिया घर सम्भालने के साथ नोकरी भी करती हे।" मैंने कहा "मगर नोकरी करे या नही ये तो उस लड़की की मर्जी हे, कोई अपनी बहु से नोकरी करवाने की डिमांड या उम्मीद कैसे कर सकता हे। ये उसकी जिम्मेदारी तो नही हे।"
बोली "अब आजकल का तो चलन हे, हम अगर नोकरी पेशा बहु चाहते हे तो इसमें क्या गलत हे।"
खैर ये उनकी सोच थी। मगर हम घर लौटते वक़्त यही सोच रहे थे की एक वक़्त था जब शादी के लिए रंग रूप तक को ज्यादा तवज्जो ना देकर स्त्री सुलभ गुणों को तवज्जो दी जाती थी। फिर सीरत के साथ साथ सूरत को भी जरुरी समझा जाने लगा। और कम ख़ूबसूरत और गरीब लड़की की शादी एक बड़ा मसला बन गयी। और अब कही गोरी ख़ूबसूरत और पढ़ी लिखी होने के साथ साथ प्रोफेशनली क्वालिफाइड होना शादी के लिए अनिवार्य योग्यता ना बन जाये। वक़्त बदल तो रहा हे मगर वक़्त के साथ साथ समाज की सोच बदलने में शायद बहुत वक़्त लगेगा।
Monday, 21 November 2016
जादुई अल्फाज़
कुछ अल्फाज़ जादुई असर रखते हे। इसी तरह का एक वाक्य हे " मायूसी कुफ्र हे"। मतलब जो ज़िन्दगी में किसी भी मुश्किल वक़्त में मायूस हो गया मतलब उसने खुदा को मानने से इंकार कर दिया जो हर तकलीफ में हर यकीन करनेवाले के साथ होता हे। किसी और का पता नही मगर हम जब भी किसी वजह से मायूस या निराश होते हे तो फ़ौरन ख्याल आता हे की नही अगर हमे खुदा की ज़ात में यकीन हे तो हम उसकी रहमत और मदद से मायूस नही हो सकते। और अगले ही पल दिल और दिमाग में उस मुश्किल वक़्त का उम्मीद के साथ सामना करने का होसला महसूस होता हे। इसीलिए ये अल्फाज़ हमारी ज़िन्दगी में जादू का असर रखते हे।
Monday, 17 October 2016
दुआ
दुआ पहुची हे तो फिर पूरी जाएगी,
मुश्किल ही सही राह फिर भी निकल ही आएगी।
दौरे बहारा ज़िन्दगी में फिर लौट आएगी,
रात गहरी ही सही मगर सुबह आएगी।
वक़्त बदलने में वक़्त नही लगता,
खुशिया जो मिलेगी तो समेटी ना जाएगी।
हे इम्तिहान सख्त तो रहमत भी बड़ी होगी,
रब..के खजाने में कमी हे ना आएगी।
Sunday, 9 October 2016
दर्द
बुजुर्गो ने संभाल रखा था, जिस विरासत को बरसों,
वो भाईचारे के मोती, क्यूकर बिखर गये।
सियासत की ही ये साजिश दिखाई देती हे वरना,
गीता और कुरान कभी लड़ते, देखे नही गये।
इस शहर की हवाओं में क्या मोहब्बत की कमी हे,
की कोई फेंके जो चिंगारी तो हम बारूद बन गये।
ये पत्थर जो फेंके गये हे, घरो पर हमारे
इंसानियत की रूह को ज़ख़्मी कर गये।
बचपन में जो खेले थे इक गाँव की गलियों में,
नफरत की आग में आखिर क्यूकर झुलस गये।
Friday, 23 September 2016
Thursday, 1 September 2016
अनकही
स्त्री, जिससे सिर्फ अपेक्षा की जाती हे। क्योकि वो स्त्री हे। एक आदर्श स्त्री की न तो कोई ख्वाहिशे होनी चाहिए न ही कोई अपना फैसला। या यु कहे की उसकी कोई अपनी कोई ज़िन्दगी ही नही। पहले माँ बाप के लिए जीती हे, फिर पति और बच्चो के लिए। चाहती तो वो भी हे, निर्विरोध बहना, किसी विप्लवी नदी की तरह। हर बाधा को पार करते हुए, निरंतर। हर बंधन से मुक्त, जीवन से भरी। चाहती हे अपनी धारा को खुद राह देना, मगर डरती हे, नही तोड़ पाती किनारों के बंधन। ये बंधन उसके अपने ही तो बांधे हुए हे। शायद उसके अस्तित्व के रक्षक। ये किनारे टूट जाये तो शायद इस विप्लवी का अस्तित्व भी ना रहे। काश की कोई ऐसी दुनिया ही जहा बह सके हर किनारे को तोडकर, काश........
Wednesday, 10 February 2016
अजनबी
कोई इंसान अपने परिवार, दोस्त,और अपने करीबी लोगों के साथ कितना भी अच्छा हो मगर जब बात अजनबी की हो तो सब एक जैसे साबित होते है, इंसानी व्यवहार की ये सच्चाई है, वो अपवाद होते है जो अजनबी से भी ईमानदारी और निस्वार्थता का व्यवहार करे.....