भाषा....यूँ तो अपनी बात कहने का एक जरिया, मगर उर्दू इससे कही बढ़कर इल्म ओ अदब की तहज़ीबी का मयार समझी जाती है। कहते है कि अगर अदब सीखना हो तो उर्दू सीख लो। अब ये अलग बात है कि पहले आप पहले आप मे गाड़ी ही निकल जाये।
खैर इल्म ओ अदब तो अपनी जगह रहा , मगर हमे लगता है कि उर्दू कुछ कुछ इश्किया भाषा भी है। अब बॉलीवुड के नायकों को ही देख लीजिए। किसी नायक का इश्क पूरा ही नही होता, अगर उर्दू में दो चार डायलॉग या गज़ल, गाने ना गा ले। और तो और अगर टीन एज बच्चो को अगर उर्दू का शौक लग गया तो माँ बाप की नींद हराम हो जाती है। मने चक्कर क्या है। आजकल बड़ी शायरी कर रहा है। अब शायरी का शौक़ तो यूँ भी हो सकता है बिना किसी चक्कर के।
और कही पति को उर्दू का शौक लग गया तो पत्नी तो "सच का सामना -- द्वितीय" का फार्म ही मंगवा ले, लॉयल्टी टेस्ट के लिए। ☺
वैसे थोड़ी बहुत बोल और पढ़ तो हम भी लेते है उर्दू मगर हमारा तो बस इतना ही है कि --
"बात करने का हसीं तौर तरीका सीखा,
हमने उर्दू के बहाने सलीका सीखा।"
मगर सोचने की बात ये है कि जिनकी मातृभाषा खालिस उर्दू हो, उनका क्या ☺☺