पिछले दिनों एक दूर की रिश्तेदार से मुलाकात हुई, काफी दिनों से अपने बेटे के लिए लड़की देख रही हे। मगर अभी तक कोई उनके मानकों पर खरी नही उतरी। मैंने कहा आंटीजी ऐसा भी क्या देख रही हो। बोली "अब क्या कहें आजकल के लडको को ख़ूबसूरत, पढ़ी लिखी तो चाहिए ही प्रोफेशनली क्वालिफाइड भी हो।अब देखो ना आजकल तो लडकिया घर सम्भालने के साथ नोकरी भी करती हे।" मैंने कहा "मगर नोकरी करे या नही ये तो उस लड़की की मर्जी हे, कोई अपनी बहु से नोकरी करवाने की डिमांड या उम्मीद कैसे कर सकता हे। ये उसकी जिम्मेदारी तो नही हे।"
बोली "अब आजकल का तो चलन हे, हम अगर नोकरी पेशा बहु चाहते हे तो इसमें क्या गलत हे।"
खैर ये उनकी सोच थी। मगर हम घर लौटते वक़्त यही सोच रहे थे की एक वक़्त था जब शादी के लिए रंग रूप तक को ज्यादा तवज्जो ना देकर स्त्री सुलभ गुणों को तवज्जो दी जाती थी। फिर सीरत के साथ साथ सूरत को भी जरुरी समझा जाने लगा। और कम ख़ूबसूरत और गरीब लड़की की शादी एक बड़ा मसला बन गयी। और अब कही गोरी ख़ूबसूरत और पढ़ी लिखी होने के साथ साथ प्रोफेशनली क्वालिफाइड होना शादी के लिए अनिवार्य योग्यता ना बन जाये। वक़्त बदल तो रहा हे मगर वक़्त के साथ साथ समाज की सोच बदलने में शायद बहुत वक़्त लगेगा।
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Friday, 25 November 2016
शादी के लिए अनिवार्य योग्यता
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