"केशलेश इंडिया" का नारा जोरो पर हे। वैसे " केशलेश" से इतने भी अनजान नही हे हम भारतीय। लगता तो यही हे जैसे हर दूसरा भारतीय "केशलेश" से पीड़ित हो, वरना "केश चिंग पिंग" और "केश आन्ति कांती" के नाम पर बाबा ज्ञानदेव और उन सरीखे "केशयुक्त" कैसे हो जाते। खैर किसी की क्या कहें, चक्कर में तो हम भी आ गये। तीन चार बोतल खाली करने के बाद भी जब केश में कांति नजर नही आयीं, तब पता चला की भैय्या "पोपट" बन गये। एक तरह का केशलेश तो संभाल नही पाए , बस अब तो यही दुआ हे की दूसरी तरह का "केशलेश" जरुर सफल हो जाये, वरना कही प्रयोग विफल हो गया तो सच में राधे के गंजे होने की नोबत आ जाएगी।
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