देखते ही देखते ये साल भी गुजर गया। पीछे छोड़ गया कुछ अच्छी बुरी, खट्टी मीठी यादे। ये वर्ष विदा लेने के कगार पर हे और यही सही वक़्त हे की हर स्त्री दुःख और सुख के मिले जुले अनुभवों से सीखकर, जिए गये जीवन और विचारो का विश्लेषण करे और अपनी संतान को जागरूक बनाये और अच्छे बुरे की पहचान सिखाये। आखिर आज गिरते हुए नैतिक स्तर की वजह मूलरूप से मानवीय चेतना का अभाव ही तो हे। आज नैतिकता को ताक में रखकर बड़े बड़े उपद्रव करने वाले, कभी थे ही तो बच्चे ही ना। अगर उन्हें बचपन से उचित संस्कार दिए जाते तो आज लाभ, लोभ और लालच में अंधे होकर, इतनी आसानी से ये सब नही कर जाते। आज अगर हम अपनी संतान को सही गलत का फर्क करना, नारी का सम्मान करना, बड़े बुजुर्गो की इज्जत और मदद करना और आजीविका के लिए यथासम्भव ईमानदारी रखना सिखायेंगे, तब जाकर वो कल के अच्छे इन्सान और अच्छे नागरिक बनेंगे।
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