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Sunday, 19 February 2017

ये कैसी तस्वीर चमन की

अख़बार में छपनेवाली खबरे समाज में होने वाली घटनाओ का ही तो प्रतिबिम्ब होती हे। अपने बच्चो की रक्षा तो एक जानवर भी कर लेता हे, मगर हजारो वर्षो की निरंतर प्रगति और ज्ञान के फलस्वरूप तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले हमारे समाज में आज भी बच्चियों को पैदा होते ही फेंक देने वाली घटनाए अक्सर सामने आती रहती हे। आज सुबह अख़बार खोलते ही ऐसी ही एक खबर पर नजर पड़ी। खबर देखते ही मन क्षुब्ध हो गया। हालाँकि इस तरह की खबरे अक्सर आती रहती हे मगर चूँकि घटना पास के ही किसी गाँव की थी तो और भी ज्यादा मन खराब हो गया। चाय की मिठास भी जाती रही, ऐसा लगा कडवा घूंट निगल रहे हो। चाय सिंक में फेंककर, मन ठीक करने के लिए टीवी चालू किया। टीवी ऑन करते ही कोई म्यूजिक चैनल लग गया, जिस पर  "माँ  बहन और बीवी" फिल्म का गाना चल रहा था  " नारी कैसी शान हे तेरी, हर तस्वीर महान हे तेरी......."

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